गुरुवार, 17 मार्च 2022

हिंदी टाइपिंग कैसे सीखे

 हिंदी टाइपिंग कैसे सीखे 

कृति देव हिंदी टाइपिंग हुआ या कुछ भी जो भी कुछ नया आप सीखना जानना चाहते है उसके लिए सबसे पहले आपको ठानना होगा की हा मुझे हिंदी टाइपिंग सीखनी है उसके लिए कितनी भी मेहनत मुझे करनी पड़े मैं सब करने को तैयार हूँ!!! अगर आप एक बार ठान लिए तो समझ लीजिये  आप 50% काम  कर चुके है!! मैंने भी हिंदी टाइपिंग सीखी है और मेरा स्पीड आज 60 (WPR) वर्ड पर  मिनट है :- मैंने हिंदी टाइपिंग कैसे सिखा !! कहा से सिखा !! आज मैं आपको अपना अनुभव बता रहा हूँ 

हिंदी टाइपिंग के लिए कुछ जरुरी बातें :-


  1. सबसे पहले आपको ये बात ध्यान में रखना है की आप के फिंगर किबोर्ड पर सही क्रम में रहे 
  2. प्रेक्टिस आपको न तो ज्यादा देर तक करनी है न कम समय तक आपको 1 -1 घंटे का टारगेट लेकर 3 शिफ्ट में करनी है 
  3.  शुरु में जल्दबाजी करने की जरूरत नही है और न ही कीबोर्ड याद करने की जैसे जैसे आप आगे बढ़ते जायेंगे आपके आपके फिंगर को सभी कीबोर्ड याद होते जायेंगे  
  4. आपको इस इस लिंक पर जाना है  https://indiatyping.com/index.php/typing-tutor/hindi-typing-tutor-krutidev  और आपको प्रेक्टिस करनी है



बुधवार, 31 अगस्त 2016

गर्म पानी पीने के फायदे Benefits of Drinking Hot Water

garam pani pic के लिए चित्र परिणामपानी अमृत है, हमारे शरीर में 70 प्रतिशत पानी पाया जाता है। यही नहीं पानी हमारी त्वचा को मुलायम और चमकदार बनता है साथ ही हमे कई सारी बिमारियों से भी दूर रखता है। कहा जाता है कि कई सारी रोज़मरा की छोटी छोटी बिमारियों का इलाज हम पानी पीके से कर सकते हैं।
वैज्ञानिक मानते है कि गर्म पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। सुबह खाली पेट व रात को खाने के बाद पानी पीने से पाचन संबंधी दिक्कते खत्म हो जाती है व कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं। तो आईये जाने हम ऐसे ही कुछ और गर्म पानी पीने के फ़ायदे के बारे में -
  1. गले और नाक के कन्जेस्चन से आराम दिलाये : ठण्ड में अक्सर देखा गया है कि लोग गले की समस्या से परेशान रहते हैं। जिससे आगे चल कर खासी और खराश जैसी परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए गर्म पानी पिए और गर्म पानी से ही गरारा भी करें।
  2. शरीर के विषैले तत्व को बाहर करे : गर्म पानी पीने से शरीर से हर तरह के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। क्योंकि गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है जिससे पसीना निकलता है। और अगर आप उसी गर्म पानी में नींबू डाल लें तो वह और फ़ायदा करेगा।
  3. मुँहासे और पिंपल्स : लड़कियों में मुँहासे और पिंपल्स की समस्या आम बात है लेकिन आज कल तो यह परेशानी लड़कों में भी देखी गयी है। इससे बचने के लिए रोज़ सुबह खली पेट एक गिलास गर्म पानी पिए।
  4. बालों के लिए फायदेमंद : गर्म पानी बालों के लिए भी फायदेमंद है। यह बालों की जड़ों को मजबूत बनता है साथी नए बालों को भी उगने में मदद करता है।
  5. ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है : अगर शरीर का ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं है तो आपको कई सारी बीमारियाँ घेर सकती हैं। इसे बचने के लिए गर्म पानी पियें यह आपके पाचन तंत्र को मजबूत बनता साथी कई सारे रोगों से लड़ने की शक्ति भी देता है।
  6. पेट साफ़ रखने के लिए : गर्म पानी ऐसे तो बहुत सारे फायदे देता है लेकिन इनसब में सबसे ज्यादा फ़ायदा हमारे पाचन तंत्र को मिलता है। गर्म पानी पीने से आंतों में जमा मल आसानी से निकल जाता है। जिससे आपका पेट साफ़ रहता है। और अगर आपको कब्ज की परेशानी है तो यह उसे भी आराम दिलाता है।
  7. वजन कम करे : वजन कम करना है तो गर्म पानी पियें। हम सब चाहते है कि हम फिट रहें लेकिन इसके लिए व्यायाम नहीं करना चाहते हैं। तो ठीक है फिर रोज़ सुबह खली पेट गर्म पानी पिए। यह आपके शरीर से अनचाह फैट निकल देगा और आपको एक खूबसूरत शरीर मिलेगा।
  8. मासिक धर्म के दर्द से राहत : लड़कियों को पीरियड्स के दौरान अगर पेट दर्द हो तो ऐसे में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती है। दरअसल इस दौरान होने वाले पैन में मसल्स में जो खिंचाव होता है उसे गर्म पानी रिलैक्स कर देता है।
  9. उम्र घटाए : विषैले पदार्थों का आपके शरीर से निकलना बहुत जरुरी है, क्योंकि यह आपको जल्दी बूढ़ा बनता है। सुबह गर्म पानी पीने से आपकी त्वचा की झुर्रिया काम होती है साथी ही पेट भी साफ़ रहता है।

१ बार जरूर पढ़ो शायद आपके काम आ जाये

स्वस्थ रहने के स्वर्णिम सूत्र

  • स्वस्थ के लिए चित्र परिणाम        सदा ब्रह्ममुहूर्त (पातः 4-5 बजे) में उठना चाहिए। इस समय प्रकृतिमुक्तहस्तसे स्वास्थ्य, प्राणवायु, प्रसन्नता, मेघा, बुद्धि की वर्षा करती है।
  • बिस्तर से उठते ही मूत्र त्याग के पश्चात उषा पान अर्थात बासी मुँह 2-3 गिलास शीतल जल के सेवन की आदत सिरदर्द, अम्लपित्त, कब्ज, मोटापा, रक्तचाप, नैत्र रोग, अपच सहित कई रोगों से हमारा बचाव करती है।
  • स्नान सदा सामान्य शीतल जल से करना चाहिए। (जहाँ निषेध न हो)
  • स्नान के समय सर्वप्रथम जल सिर पर डालना चाहिए, ऐसा करने से मस्तिष्क की गर्मी पैरों से निकल जाती है।
  • दिन में 2 बार मुँह में जल भरकर, नैत्रों को शीतल जल से धोना नेत्र दृष्टि के लिए लाभकारी है।
  • नहाने से पूर्व, सोने से पूर्व एवं भोजन के पश्चात् मूत्र त्याग अवश्य करना चाहिए। यह आदत आपको कमर दर्द, पथरी तथा मूत्र सम्बन्धी बीमारियों से बचाती है।
  • सरसों, तिल या अन्य औषधीय तेल की मालिश नित्यप्रति करने से वात विकार,, बुढ़ापा, थकावट नहीं होती है। त्वचा सुन्दर , दृष्टि स्वच्छ एवं शरीर पुष्ट होता है।
  • शरीर की क्षमतानुसार प्रातः भ्रमण, योग, व्यायाम करना चाहिए।
  • अपच, कब्ज, अजीर्ण, मोटापा जैसी बीमारियों से बचने के लिए भोजन के 30 मिनट पहले तथा 30 मिनट बाद तक जल नहीं पीना चाहिए। भोजन के साथ जल नहीं पीना चाहिए। घूँट-दो घूँट ले सकते हैं।
  • दिनभर में 3-4 लीटर जल थोड़ा-थोड़ा करके पीते रहना चाहिए।
  • भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • भोजन के उपरान्त वज्रासन में5-10 मिनट बैठना तथा बांयी करवट 5-10 मिनट लेटना चाहिए।
  • भोजन के तुरन्त बाद दौड़ना, तैरना, नहाना, मैथुन करना स्वास्थ्य के बहुत हानिकारक है।
  • भोजन करके तत्काल सो जाने से पाचनशक्ति का नाश हो जाता है जिसमें अजीर्ण, कब्ज, आध्मान, अम्लपित्त (प्दकपहमेजपवदए ब्वदेजपचंजपवदए ळंेजतपजपेए ।बपकपजल) जैसी व्याधियाँ हो जाती है। इसलिए सायं का भोजन सोने से 2 घन्टे पूर्व हल्का एवं सुपाच्य करना चाहिए।
  • शरीर एवं मन को तरोताजा एवं क्रियाशील रखने के लिए औसतन 6-7 घन्टे की नींद आवश्यक है।
  • गर्मी के अलावा अन्य ऋतुओं में दिन में सोने एवं रात्री में अधिक देर तक जगने से शरीर में भारीपन, ज्वर, जुकाम, सिर दर्द एवं अग्निमांध होता है।
  • दूध के साथ दही, नीबू, नमक, तिल उड़द, जामुन, मूली, मछली, करेला आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। त्वचा रोग एवं ।ससमतहल होने की सम्भावना रहती है।
  • स्वास्थ्य चाहने वाले व्यक्ति को मूत्र, मल, शुक्र, अपानवायु, वमन, छींक, डकार, जंभाई, प्यास, आँसू नींद और परिश्रमजन्य श्वास के वेगों को उत्पन्न होने के साथ ही शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए।
  • रात्री में सोने से पूर्व दाँतों की सफाई, नैत्रों की सफाई एवं पैरों को शीतल जल से धोकर सोना चाहिए।
  • रात्री मेंशयन से पूर्व अपने किये गये कार्यों की समीक्षा कर अगले दिन की कार्य योजना बनानी चाहिए। तत्पश्चात् गहरी एवं लम्बी सहज श्वास लेकर शरीर को एवं मन को शिथिल करना चाहिए। शान्त मन से अपने दैनिक क्रियाकलाप, तनाव, चिन्ता, विचार सब परात्म चेतना को सौंपकर निश्चिंत भाव से निद्रा की गोद में जाना चाहिए।

सोमवार, 22 अगस्त 2016

क्या यही प्यार है? अगर ये 10 लक्षण हैं तो हां, आप प्यार में हो

क्या तुमने कभी किसी से प्यार किया? अगर ज़ोर से चिल्ला के तुमने बोला है 'किया' तो आप शायद समझ जाओगे वो प्यार में पड़ने का आलम. जब आंखों में घर कर लेता है एक ही चेहरा, जब उसके फ़ोन की घंटी राग यमन सा एहसास दिलाती है, जब सपनों पर राज होता है उस जाने-अनजाने इंसान का, तब बेटा समझ जाओ कि प्यार नाम के रोग ने तुम्हें जकड़ लिया है.

1= उसके सामने आते ही चेहरा खिल उठता है

2= जब वो न हो तो ज़िन्दगी बेमानी सी लगती है

3. उसके हर WhatsApp मैसेज पर मन गुलाटियां लगाता है

5. उसे किसी और के साथ देखने पर आग लग जाती है

6. उसकी हर छोटी-बड़ी बात दिलचस्प लगती है

7. उसके साथ मन ही मन सात जन्मों तक की प्लानिंग हो जाती है

8. उसके लिए नामुमकिन को मुमकिन करने का मन होता है

9. उसकी महक रोम-रोम में बस जाती है

10. उसका नाम पूरी दुनिया को बताने का मन करता है



शनिवार, 20 अगस्त 2016

Computer के Hard Disk में Partition कैसे बनाते हैं

Is samy sare kam computer se ho rhe hai so sbhi ke pas computar ka hona aam bat ho gyi hai. But isme kuchh samany jankari na ho jaise- Computr ke hard disk me partition set karna, pc ko format karna, Software ko Intall karna etc. to har bar apne pc ko set karane ke liye kisi dusre ka sahara lena padta hai, Ydi aap Computar software ya hardware ingineer ke pas le jate hai to uska charge dena padta hai.

Computer ke hard disk me partition kaise banaye

So mai aapko Computer के Hard Disk में Partition banane ke bare me batane ja rha hu, Jo ki har Laftop/computer ke liye bahut hi jaruri hota hai.

Computer me Partition kya hota hai ?

jab ham computur ko open karke my computer me jate hai to C, D, E, F, is tarh se kuch box dikhai deta hai usi ko bhag ya partetion kahte hai. Yah har sistim me bnaye jate hai. Agar aap aur adhik banana chahte hai to bana sakte hai. And Hard disk ke partetion ka size kam ya jyada bhi kar sakte hai. Bus aapko compurur ki besic jankari honi chahiye.

Computer me Partition se kya faida hota hai ?

 Partition se anek fayde hote hai. jise har computer user bina iske bare me jane hardisk partitione ke fadai ko use karte hai. jaise -

1. Sistim ko format karne me aasani -  Sabhi log apne computer me alag - alag bhag banate hai. And  "C" Drive me Opriting sistiom, other applitions ko rakhte hai. Agar kisi tarh se koi problum opprating sistim me hoti hai to "C" drive ko format karte hai.
2. Data ko search karne me aasan - Apne computar me jo data aapne stor kiya hai, usko Ydi partetion bana kar rakhe hai, to dhudhne me kafi aasan hota hai.

Computer / Laptop ke hard disk me partition kaise banaye ?

Agar aap soch rhe ho ki computer aur laptop dono me ek hi tarh se part bnate hai, to bilkul sahi think hai aapki, maine niche step diya hai jise fallo karke kisi bhi sistiom me partian bana sakte hai.
Step-1:

Sabse pahle computar ko on karke Start ke icon par click kare. jo ki left side ke corner par hota hai.

Step-2:

Ab search box me Computer Mamagement type karke enter karen. Ya uske option par click kare. Jo new window open hoti hai usme Disk Mamagement par click karen.

Disk Mamagement

Step-3:

Jaise hi aap disk managment par clicks karte hai, hard disk ke sabhi partetion show hoge. Jis bhag me aapko new partition creat karna hai Uske upar arrow lejakr Right click karne par ek new khidki open hogi. Jisme aapko shrink Volume par click karna hai.

partition


Step-4:

Ab Jo khidki khulegi usme jis partetion create karne ja rhe ho uski size fill karni hai. ki kitni GB ka partiteon bna rhe hai. Fir Shrink par clickk kar de.

Note - Yha par partetion MB me diya hai, 1024 MB = 1 GB hota hai.

shrink


Step-5:

Ab uske bagl me ek aur partiteon dikhega uske upar arrow lejakar right clicks karte hi kuchh option aajayege usme New Sample Volume par clickk kar de.

Step-6:

Ab jo khidki khulti hai usme next par click karte rhe jab tak ki finish ka option aajaye. Last me Finishaane par us par clickk kar de.

Ab aapka new partition bankar taiyar hai. Ise my computer me jakar dekh sakte hai. To dosto ye mera post kaisa lga ? 

शुक्रवार, 19 अगस्त 2016

रुद्राक्ष : हर तरह के अमंगल से बचाता है कैसे

रुद्राक्ष :

Rudraksha

भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। माना जाता है कि रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जा से बचाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ तपस्वियों के लिए ही नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन में रह रहे लोगों के लिए भी किया जाता है। जानिए, कैसे इंसानी जीवन में नकारात्मकता को कम करने में मदद करता है रुद्राक्ष:
रुद्राक्ष एक खास तरह के पेड़ का बीज है। ये पेड़ आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में एक खास ऊंचाई पर, खासकर हिमालय और पश्चिमी घाट सहित कुछ और जगहों पर भी पाए जाते हैं। अफसोस की बात यह है लंबे समय से इन पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल भारतीय रेल की पटरी बनाने में होने की वजह से, आज देश में बहुत कम रुद्राक्ष के पेड़ बचे हैं। आज ज्यादातर रुद्राक्ष नेपाल, बर्मा, थाईलैंड या इंडोनेशिया से लाए जाते हैं।

रुद्राक्ष का महत्त्व

रुद्राक्ष की खासियत यह है कि इसमें एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है। जो आपके लिए आप की ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं। इसीलिए रुद्राक्ष ऐसे लोगों के लिए बेहद अच्छा है जिन्हें लगातार यात्रा में होने की वजह से अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ता है। आपने गौर किया होगा कि जब आप कहीं बाहर जाते हैं, तो कुछ जगहों पर तो आपको फौरन नींद आ जाती है, लेकिन कुछ जगहों पर बेहद थके होने के बावजूद आप सो नहीं पाते।
रुद्राक्ष को पानी के ऊपर पकड़ कर रखने से अगर वह खुद-ब-खुद घड़ी की दिशा में घूमने लगे, तो इसका मतलब है कि वह पानी पीने लायक है। अगर पानी जहरीला या हानि पहुंचाने वाला होगा तो रुद्राक्ष घड़ी की दिशा से उलटा घूमेगा।
इसकी वजह यह है कि अगर आपके आसपास का माहौल आपकी ऊर्जा के अनुकूल नहीं हुआ तो आपका उस जगह ठहरना मुश्किल हो जाएगा। चूंकि साधु-संन्यासी लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं, इसलिए बदली हुई जगह और स्थितियों में उनको तकलीफ हो सकती है। उनका मानना था कि एक ही स्थान पर कभी दोबारा नहीं ठहरना चाहिए। इसीलिए वे हमेशा रुद्राक्ष पहने रहते थे। आज के दौर में भी लोग अपने काम के सिलसिले में यात्रा करते और कई अलग-अलग जगहों पर खाते और सोते हैं। जब कोई इंसान लगातार यात्रा में रहता है या अपनी जगह बदलता रहता है, तो उसके लिए रुद्राक्ष बहुत सहायक होता है।

रुद्राक्ष के फायदे

रुद्राक्ष के संबंध में एक और बात महत्वपूर्ण है। खुले में या जंगलों में रहने वाले साधु-संन्यासी अनजाने सोत्र का पानी नहीं पीते, क्योंकि अक्सर किसी जहरीली गैस या और किसी वजह से वह पानी जहरीला भी हो सकता है। रुद्राक्ष की मदद से यह जाना जा सकता है कि वह पानी पीने लायक है या नहीं। रुद्राक्ष को पानी के ऊपर पकड़ कर रखने से अगर वह खुद-ब-खुद घड़ी की दिशा में घूमने लगे, तो इसका मतलब है कि वह पानी पीने लायक है। अगर पानी जहरीला या हानि पहुंचाने वाला होगा तो रुद्राक्ष घड़ी की दिशा से उलटा घूमेगा। इतिहास के एक खास दौर में, देश के उत्तरी क्षेत्र में, एक बेहद बचकानी होड़ चली। वैदिककाल में सिर्फ एक ही भगवान को पूजा जाता था – रुद्र यानी शिव को। समय के साथ-साथ वैष्णव भी आए। अब इन दोनों में द्वेष भाव इतना बढ़ा कि वैष्णव लोग शिव को पूजने वालों, खासकर संन्यासियों को अपने घर बुलाते और उन्हें जहरीला भोजन परोस देते थे। ऐसे में संन्यासियों ने खुद को बचाने का एक अनोखा तरीका अपनाया। काफी शिव भक्त आज भी इसी परंपरा का पालन करते हैं। अगर आप उन्हें भोजन देंगे, तो वे उस भोजन को आपके घर पर नहीं खाएंगे, बल्कि वे उसे किसी और जगह ले जाकर, पहले उसके ऊपर रुद्राक्ष रखकर यह जांचेंगे कि भोजन खाने लायक है या नहीं।

रुद्राक्ष माला एक कवच की तरह है

रुद्राक्ष नकारात्मक ऊर्जा के बचने के एक असरदार कवच की तरह काम करता है। कुछ लोग नकारात्मक शक्ति का इस्तेमाल करके दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह अपने आप में एक अलग विज्ञान है। अथर्व वेद में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है कि कैसे ऊर्जा को अपने फायदे और दूसरों के अहित के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। अगर कोई इंसान इस विद्या में महारत हासिल कर ले, तो वह अपनी शक्ति के प्रयोग से दूसरों को किसी भी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है, यहां तक कि दूसरे की मृत्यु भी हो सकती है। इन सभी स्थितियों में रुद्राक्ष कवच की तरह कारगर हो सकता है।
आपको शायद ऐसा लगता हो कि कोई मुझे क्यों नुकसान पहुंचाएगा! लेकिन यह जरूरी नहीं कि जान बूझकर आपको ही लक्ष्य बनाया गया हो। मान लीजिए आपके पास बैठे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन वह आदमी उस ऊर्जा के प्रति ग्रहणशील नहीं है। 
पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे सुरक्षित विकल्प है जो हर किसी – स्त्री, पुरुष, बच्चे, हर किसी के लिए अच्छा माना जाता है। यह सेहत और सुख की दृष्टि से भी फायदेमंद हैं, जिससे रक्तचाप नीचे आता है और स्नायु तंत्र तनाव मुक्त और शांत होता है।
ऐसे में, उसके बगल में बैठे होने की वहज से, उस शक्ति का नकारात्मक असर आप पर भी हो सकता है। यह ठीक वैसे ही है कि जैसे किसी सडक़ पर दो लोग एक-दूसरे पर गोली चला रहे हैं, लेकिन गोली गलती से आपको लग जाती है। भले ही गोली आप पर नहीं चलाई गई, फिर भी आप जख्मी हो सकते हैं, क्योंकि आप गलत वक्त पर गलत जगह पर मौजूद थे। हालांकि इस सबसे डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन रुद्राक्ष ऐसी किसी भी परिस्थिति से आपकी रक्षा करता है।
गुरु एक ही रुद्राक्ष को अलग-अलग लोगों के लिए अलग-तरह से जागृत करता है। परिवार में रहने वाले लोगों के लिए रुद्राक्ष अलग तरह से प्रतिष्ठित किए जाते हैं। अगर आप ब्रह्मचारी या संन्यासी हैं, तो आपके रुद्राक्ष को दूसरे तरीके से ऊर्जित किया जाएगा। ऐसा रुद्राक्ष सांसारिक जीवन जी रहे लोगों को नहीं पहनना चाहिए।
रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर 21-मुखी तक होते हैं, जिन्हें अलग-अलग प्रयोजन के लिए पहना जाता है। इसलिए बस किसी भी दुकान से कोई भी रुद्राक्ष खरीदकर पहन लेना उचित नहीं होता। हालांकि पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे सुरक्षित विकल्प है जो हर किसी – स्त्री, पुरुष, बच्चे, हर किसी के लिए अच्छा माना जाता है। यह सेहत और सुख की दृष्टि से भी फायदेमंद हैं, जिससे रक्तचाप नीचे आता है और स्नायु तंत्र तनाव मुक्त और शांत होता है।

रुद्राक्ष की पहचान कैसे करें

रुद्राक्ष हमेशा उन्हीं लोगों से संबंधित रहा है, जिन्होंने इसे अपने पावन कर्तव्य के तौर पर अपनाया। परंपरागत तौर पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी वे सिर्फ रुद्राक्ष का ही काम करते रहे थे। हालांकि यह उनके रोजी रोटी का साधन भी रहा, लेकिन मूल रूप से यह उनके लिए परमार्थ का काम ही था। जैसे-जैसे रुद्राक्ष की मांग बढ़ने लगी, इसने व्यवसाय का रूप ले लिया। आज, भारत में एक और बीज मिलता है, जिसे भद्राक्ष कहते हैं और जो जहरीला होता है। भद्राक्ष का पेड़ उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षत्रों में बहुतायत में होता है। पहली नजर में यह बिलकुल रुद्राक्ष की तरह दिखता है।
जब आप रुद्राक्ष धारण करते हैं, तो यह आपके प्रभामंडल (औरा) की शुद्धि करता है।
देखकर आप दोनों में अंतर बता नहीं सकते। अगर आप संवेदनशील हैं, तो अपनी हथेलियों में लेने पर आपको दोनों में अंतर खुद पता चल जाएगा। चूंकि यह बीज जहरीला होता है, इसलिए इसे शरीर पर धारण नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद बहुत सी जगहों पर इसे रुद्राक्ष बताकर बेचा जा रहा है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि जब भी आपको रुद्राक्ष लेना हो, आप इसे किसी भरोसेमंद जगह से ही लें।
जब आप रुद्राक्ष धारण करते हैं, तो यह आपके प्रभामंडल (औरा) की शुद्धि करता है। इस प्रभामंडल का रंग बिलकुल सफेद से लेकर बिलकुल काले और इन दोनों के बीच पाए जाने वाले अनगिनत रंगों में से कुछ भी हो सकता है। इसका यह मतलब कतई नहीं हुआ कि आज आपने रुद्राक्ष की माला पहनी और कल ही आपका प्रभामंडल सफेद दिखने लगे!
अगर आप अपने जीवन को शुद्ध करना चाहते हैं तो रुद्राक्ष उसमें मददगार हो सकता है। जब कोई इंसान अध्यात्म के मार्ग पर चलता है, तो अपने लक्ष्य को पाने के लिए वह हर संभव उपाय अपनाने को आतुर रहता है। ऐसे में रुद्राक्ष निश्चित तौर पर एक बेहद मददगार जरिया साबित हो सकता है।

कृष्ण नाम का महत्व जन्माष्टमी स्पेशल

                                                                                                         श्री शुकदेवजी राजा परीक्षित्‌ से कहते हैं

सकृन्मनः कृष्णापदारविन्दयोर्निवेशितं तद्गुणरागि यैरिह।
न ते यमं पाशभृतश्च तद्भटान्‌ स्वप्नेऽपि पश्यन्ति हि चीर्णनिष्कृताः

                     हिंदी अर्थ 

जो मनुष्य केवल एक बार श्रीकृष्ण के गुणों में प्रेम करने वाले अपने चित्त को श्रीकृष्ण के चरण कमलों में लगा देते हैं, वे पापों से छूट जाते हैं, फिर उन्हें पाश हाथ में लिए हुए यमदूतों के दर्शन स्वप्न में भी नहीं होते।


अविस्मृतिः कृष्णपदारविन्दयोः
क्षिणोत्यभद्रणि शमं तनोति च।
सत्वस्य शुद्धिं परमात्मभक्तिं
ज्ञानं च विज्ञानविरागयुक्तम्‌

 हिंदी अर्थ 

श्रीकृष्ण के चरण कमलों का स्मरण सदा बना रहे तो उसी से पापों का नाश, कल्याण की प्राप्ति, अन्तः करण की शुद्धि, परमात्मा की भक्ति और वैराग्ययुक्त ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति आप ही हो जाती है।

अविस्मृतिः कृष्णपदारविन्दयोः
क्षिणोत्यभद्रणि शमं तनोति च।
सत्वस्य शुद्धिं परमात्मभक्तिं
ज्ञानं च विज्ञानविरागयुक्तम्‌

हिंदी अर्थ 

श्रीकृष्ण के चरण कमलों का स्मरण सदा बना रहे तो उसी से पापों का नाश, कल्याण की प्राप्ति, अन्तः करण की शुद्धि, परमात्मा की भक्ति और वैराग्ययुक्त ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति आप ही हो जाती है।

पुंसां कलिकृतान्दोषान्द्रव्यदेशात्मसंभवान्‌।
सर्वान्हरित चित्तस्थो भगवान्पुरुषोत्तमः

हिंदी अर्थ 

भगवान पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण जब चित्त में विराजते हैं, तब उनके प्रभाव से कलियुग के सारे पाप और द्रव्य, देश तथा आत्मा के दोष नष्ट हो जाते हैं।

शय्यासनाटनालाप्रीडास्नानादिकर्मसु।
न विदुः सन्तमात्मानं वृष्णयः कृष्णचेतसः

हिंदी अर्थ 

श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व समझने वाले भक्त श्रीकृष्ण में इतने तन्मय रहते थे कि सोते, बैठते, घूमते, फिरते, बातचीत करते, खेलते, स्नान करते और भोजन आदि करते समय उन्हें अपनी सुधि ही नहीं रहती थी।

वैरेण यं नृपतयः शिशुपालपौण्ड्र-
शाल्वादयो गतिविलासविलोकनाद्यैः।
ध्यायन्त आकृतधियः शयनासनादौ
तत्साम्यमापुरनुरक्तधियां पुनः किम्‌

हिंदी अर्थ 

जब शिशुपाल, शाल्व और पौण्ड्रक आदि राजा वैरभाव से ही खाते, पीते, सोते, उठते, बैठते हर वक्त श्री हरि की चाल, उनकी चितवन आदि का चिन्तन करने के कारण मुक्त हो गए, तो फिर जिनका चित्त श्री कृष्ण में अनन्य भाव से लग रहा है, उन विरक्त भक्तों के मुक्त होने में तो संदेह ही क्या है?

एनः पूर्वकृतं यत्तद्राजानः कृष्णवैरिणः।
जहुस्त्वन्ते तदात्मानः कीटः पेशस्कृतो यथा

हिंदी अर्थ 

श्रीकृष्ण से द्वेष करने वाले समस्त नरपतिगण अन्त में श्री भगवान के स्मरण के प्रभाव से पूर्व संचित पापों को नष्ट कर वैसे ही भगवद्रूप हो जाते हैं, जैसे पेशस्कृत के ध्यान से कीड़ा तद्रूप हो जाता है, अतएव श्रीकृष्ण का स्मरण सदा करते रहना चाहिए।